क्वीन आफ हिमालयन फ्लावर ब्लूपोपी खिलने से घाटी हुई मनमोहक।

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Newsupdatebharat/ Report Rahul Singh Darmwal
जोशीमठ- फूलों की घाटी में इन दिनों 100 से अधिक प्रजाति के सुंदर सुंदर मनमोहक फूल अपनी छटा बिखेर रहे हैं। जबकि जुलाई खत्म होने और अगस्त के बीच में करीब 500 से अधिक प्रजाति के फूल खिलते हैं। इन दिनों यहां जापान का राष्ट्रीय पुष्प ब्लू पॉपी, फ्रीटीलारिया, हिमालियन स्लीपर, हत्था जड़ी समेत कई प्रजातियों के फूल खिले हुए हैं। यह फूलों की घाटी 87.50 वर्ग फुट क्षेत्र में फैली हुई है।
 इन फूलों के साथ ही क्वीन आफ हिमालयन फ्लावर ब्लूपोपी  खिलने के बाद फूलों की घाटी और भी मनमोहक हो जाती है। जो अपनी छटा से बिखेरती है। ये मन को लुभाने वाले सुंदर सुंदर मनमोहक फूल लोगों को अपनी ओर खींचती हैं। ये फूल घाटी में आने वाले पर्यटकों के लिये आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। इस फूलों की घाटी में जुलाई से अगस्त के बीच का समय घूमने के लिए सबसे अच्छा होता है।
कोरान काल होने से विदेशी पर्यटक अभी तक घाटी में फूलों के दीदार के लिये नहीं पहुंच पाये हैं। लेकिन देशी पर्यटक घाटी में पहुंचकर यहां खिले फूलों का दीदार कर रहे हैं।
फूलों की घाटी एक जुलाई से पर्यटकों के लिये खुल गई है। यहां पर अभी तक 500 से अधिक पर्यटक घाटी के दीदार के लिये पहुंच चूके हैं।
इन दिनों घाटी में क्वीन आफ हिमालयन फूल ब्लूपाॅपी खिला है। जिसे देखने के लिये देशी पर्यटक घाटी में पहुंच रहे हैं। यू तो जब ब्लूपाॅपी घाटी में खिल जाती है, तो विदेशी पर्यटक घाटी में पहुंचना शुरू हो जाते थे, लेकिन दो वर्षो से कोविड के चलते एक भी विदेशी पर्यटक घाटी में नहीं पहुंचे हैं। ब्लूपोपी जापन के लोगों का प्रिय पुष्प है। इस दौरान भारी तादात में जापानी लोग फूलों की घाटी के दीदार के लिये यहां आते है। फूलों की घाटी के वनक्षेत्राधिकारी बृजमोहन भारती का कहना है कि धीरे धीरे पर्यटको की संख्या भी बढ रही है। लेकिन अभी तक कोई भी विदेशी पर्यटक घाटी में नहीं पहुंचे हैं।
फूलों की पर पर्यटक ऋषिकेश से 271 किमी बदरीनाथ हाईवे के गोविंदघाट पहुंचकर यहां से फूलों की घाटी की यात्रा शुरू होती है। पर्यटकों को घाटी के बेसकैंप घांघरिया तक 14 किमी पैदल दूरी तय करना पड़ता है। घांघरिया से दो पैदल रास्ते गुजरते हैं। एक रास्ता फूलों की घाटी तो दूसरा रास्ता हेमकुंड साहिब के लिए जाता है। फूलों की घाटी में प्रवेश के लिए नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन से अनुमति ली जाती है और शुल्क जमा कराया जाता है। घाटी में दोपहर तक ही जाने की अनुमति मिलती है और घाटी में ठहरने की कोई व्यवस्था न होने के कारण दोपहर बाद वापस बैस कैंप घांघरिया आना आवश्यक है।
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