कोरोना के नाम पर मची लूट,नेता प्रतिपक्ष को 4 घंटे के 45 हजार का बिल।

रिपोर्ट- प्रवेश राणा // देहरादून

उत्तराखंड में कोरोना का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है अब तक उत्तराखंड में कोरोना मरीजों की संख्या 40 हजार पहुंच चुकी है ऐसे में स्वास्थ्य व्यवस्थाओ का बुरा हाल नजर आ रहा है प्राइवेट अस्पालों में कोरोना के नाम पर लूट मची हई है बीती रात नेता प्रतिपक्ष इंद्रा ह्रदयेश अपने कोरोना पॉजिटिव होने पर इलाज कराने को एक प्राइवेट अस्पताल में 5 घंटे तक बेड नहीं मिला उसके बाद उनको जनरल वार्ड में रखा गया और वार्ड में रखते ही उनको 45 हजार का बिल थमा दिया इससे आप अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम लोगो के लिये क्या व्यवस्थाएं होगीं .

उत्तरखंड में लगातार बढ़ रहे कोरोना मामलो के बीच स्वास्थ सेवाओं का बुरा हाल है जबकि स्वास्थ्य विभाग की कमान खुद सूबे के मुखिया त्रिवेंद्र सिहं रावत देख रहे हैं मामला ने तब ज्यादा तूल पकड़ा जब विपक्ष की कद्दावर और नेता प्रतिपक्ष को घंटो एक प्रसिद्ध प्राइवेट अस्पताल में बेड नहीं मिला जिसके बाद उनको जनरल वार्ड में रखा गया और सीधे उनके हाथ में 45 हजार का बिल थमा दिया गया जो बताता है कि किस तरह कोरोना के नाम पर प्रदेश के प्राइवेट अस्पतालों में लूट मची हुयी है और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का कितना बुरा हाल है जब प्रदेश की कद्दावर और वरिष्ठ नेता के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा हो तो आम जनता की क्या बिसात।

आपको बता दें कि उत्तराखंड कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष इंद्रा हिरदेश कोरोना पॉजिटिव पायी गयी जिसके बाद उनको हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल से व्यवस्थाएं ना होने के चलते देहरादून शिफ्ट किया गया था जहां उनको मैक्स हॉस्पिटल द्वारा जनरल वार्ड में शिफ्ट करते ही नेता प्रतिपक्ष को 45 हजार का बिल पकड़ाया,उसके बाद नेता प्रतिपक्ष वहां से भी दूसरे अस्पताल सिनर्जी में भर्ती हुयी वहां भी व्यवस्थाएं न होने के चलते आज वो गुरुग्राम के वेदांता अस्पताल के लिये रवाना हो गयी.ये यह बताने के लिए काफी है कि जब इतने बड़े लोगो का यहां पर इलाज नहीं हो पा रहा तो आम जनता तो यहां पर राम भरोसे ही है।
विपक्ष भी लगातार अब इस मामले में सरकार पर हमलावर है कांग्रेस के प्रदेश उपाधक्छ सूर्यकांत धस्माना ने सरकार को कोरोना पर पूरी तरह फेल बताया,सरकार कोरोना को काबू करने में पूरी तरह नाकाम रही स्वास्थ सुविधाएँ वेंटिलेटर पर है और कोरोना के नाम पर प्रदेश में लूट मची है और मुख़्यमंत्री खामोश है।

स्वास्थ्य व्यस्थाओं और प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है जिस तरिके से लगातार ये शिकायत सामने आ रही हैं कि प्राइवेट अस्पतालों में टेस्ट कराने पर पॉजिटिव और उसी आदमी का सरकारी अस्पताल में टेस्ट होने पर नेगेटिव रिपोर्ट आ रही है हालांकि इस बात का संज्ञान लेते हुये मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने डीएम को जांच के आदेश दिये है और अगर इस तरिके से कोई बात सामने आती है तो उन पर कार्यवाही करने को कहा गया है। पर जिस तरह से प्रदेश में कोरोना पाजिटिवो का आंकड़ा दिनों दिन बढ़ रहा है और स्वास्थ्य सुविधाएँ दम तोड़ रही हैं ये चिंता का विषय है अगर ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले दिनों में स्तिथि और भी भयावह हो सकती है।

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