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उत्तराखंड

भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष पद हेतु अखाड़े में हुई फाड़। दो मतों में बंटा अखाड़ा। अखाड़े के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी को चुना।

Newsupdatebharat Uttarakhand Haridwar Report News Desk
हरिद्वार – भारतीय अखाड़ा परिषद में दो फाड़ हो गयी हैं। तीनों बैरागी अखाड़ों के साथ महानिर्वाणी और बड़ा उदासीन अखाड़े के संतों के साथ  7 अखाड़ों ने बैठक करके अपना अध्यक्ष और महामंत्री का चुनाव कर लिया है। अखाड़ा परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र शास्त्री महाराज के अध्यक्षता में महानिर्वाणी अखाड़े में एक बैठक हुई है। जिसमें नए अध्यक्ष की जिम्मेदारी महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी को दी गई है, जबकि बैरागी अखाड़ों को महामंत्री पद दिया गया है। जिसमें राजेंद्र दास महाराज को अखाड़ा परिषद का नया महामंत्री बनाया गया है।
बता दें की महंत नरेंद्र गिरि महाराज की मौत के बाद अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का पद खाली हो गया था और 25 अक्टूबर को इलाहाबाद में अध्यक्ष पद को लेकर बैठक रखी गई थी। लेकिन उससे पहले ही सन्यासियों, वैरागी, निर्मल व उदासीन संप्रदाय के 7 अखाड़ों ने मिलकर नए अध्यक्ष और महामंत्री की घोषणा कर दी है। जिसकी घोषणा गुरुवार को महानिर्वाणी अखाड़े में की गईं। बैठक में छह संन्यासी अखाड़ों की ओर से कोई सम्मिलित नहीं हुआ जिससे साफ तौर पर कहा जा सकता है कि अखाड़ा परिषद में अब दो फाड़ हो गई है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नवनियुक्त अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज का कहा है कि अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र गिरि महाराज को श्रद्धांजलि दी गई है और ईश्वर से उनको अपने चरणों में स्थान प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं उत्तराखंड में आई भीषण आपदा में जिन लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी है और जिन सैनिकों की सहादत हुई है उन सबको अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
नवनियुक्त अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि पहले से ही अखाड़ा परिषद के चुनाव सर्वसम्मति से होता आया है। अखाड़ा परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र शास्त्री महाराज के अध्यक्षता में महानिर्वाणी अखाड़े में एक बैठक हुई है और रात्रि सभी लोगों ने मिलकर के लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अपनाते हुए अखाड़ा परिषद का चुनाव किया। हम सब मिलकर राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए कार्य करेंगे।
दूसरे अखाड़ा परिषद के लोग हमारे पूजनीय और वंदनीय है और मैं उनके वक्तव्य  पर कोई टिप्पणी नहीं कहना चाहता हूं। परंपराएं तो हमेशा बदलती रहती है। और यह परंपरा रही है कि 13 सालों में से एक पद सन्यासियों और एक पद बैरागी सन्यासियों के पास रहता है वर्तमान समय में कुछ ऐसी परिस्थिति रही जिससे इन को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता था। वर्तमान समय और लोकतंत्र में यह महत्वपूर्ण है।
आगे उन्होंने कहा कि आज हम यहां महानिर्वाणी अखाड़े में जो संत बैठे हैं उनमें महानिर्वाणी अखाड़ा, अटल अखाड़ा, बड़ा अखाड़ा उदासीन, निर्मल पंचायती अखाडा, निर्वाणी आणि अखाड़ा  दिगंबर अनी अखाड़ा और निर्वाणी अखाड़ा शामिल है। 7 अखाड़ों का बहुमत है और बहुमत के आधार पर यह चुनाव हुआ है जो पहले भी होता रहा है नरेंद्र गिरी का भी चुनाव बहुमत के आधार पर हुआ था।
उन्होंने कहा कि मेरा यह प्रयास होगा कि हम सब लोग मिलकर रहे हैं। हम लोग महंत हरी गिरी महाराज से भी बात करेंगे। बाकी और भी जो अखाड़े हैं उन सब अखाड़ों से बात करेंगे और हमारा प्रयास होगा कि हम सब अखाड़े एक साथ चलें। कुछ बातें ऐसी हैं जो वह मीडिया और आप सब लोगों के सामने नहीं कह सकता हैं। अखाड़ा परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष की अध्यक्षता में जो बैठक रखी गई थी वहां पर सभी उपस्थित हैं।
अखाड़ा परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष देवेंद्र शास्त्री का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अखाड़ा परिषद का चुनाव हुआ है। और  बहुमत से चुनाव चुना है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष और महामंत्री चुना है। जो भी पदाधिकारी चुने गए हैं। बहुमत से चुने गए हैं। जो भी बैठक हुई है लोकतांत्रिक तरीके से हुई है। अध्यक्ष रविद्र पुरी हैं।उपाध्यक्ष दामोदर दास हैं और महामंत्री राजेंद्र दास हैं। बैठक में 7 अखाड़े उपस्थित थे बाकी और आ जाएंगे।
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