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*विवादों के ‘रावत’ के ‘निजी रिश्तों’और ‘संपत्ति विवाद’ ने उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल ला दिया*

*विवादों के ‘रावत’ के ‘निजी रिश्तों’और ‘संपत्ति विवाद’ ने उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल ला दिया*

*पत्नी, कथित पत्नी और करोड़ों की संपत्ति का यह त्रिकोण आखिर क्या है?*

उत्तराखंड की राजनीति में पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत का नाम किसी न किसी विवाद से हमेशा जुड़ा रहा है, लेकिन इस बार मामला सिर्फ सियासी नहीं, बल्कि बेहद निजी और संगीन कानूनी घेरे में आ गया है। सोशल मीडिया से लेकर देहरादून की सड़कों तक, हर तरफ एक ही चर्चा है—पत्नी, कथित पत्नी और करोड़ों की संपत्ति का यह त्रिकोण आखिर क्या है?
इस पूरे घटनाक्रम पर आधारित एक तीखी और विश्लेषणात्मक रिपोर्ट:

1. दिव्यांग बुजुर्ग की संपत्ति धोखाधड़ी कर हड़पने का आरोप

इस पूरे विवाद की जड़ में देहरादून का एक हाई-प्रोफाइल संपत्ति विवाद है। एक बुजुर्ग दिव्यांग हरिओम सहगल ने हरक सिंह रावत की बेहद करीबी मानी जाने वाली जसबीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत के अनुसार, 21 जून 2021 को एक भवन खरीदने का सौदा हुआ था..आरोप है कि तय रकम का भुगतान नहीं किया गया और ₹31 लाख का चेक बैंक में बाउंस हो गया।..बुजुर्ग का आरोप है कि भुगतान किए बिना ही संपत्ति पर कब्जा कर लिया गया।
मामला इतना तूल पकड़ चुका है कि एसएसपी देहरादून ने जांच की जिम्मेदारी एसपी सिटी को सौंप दी है।

*पति, पत्नी और वो’ का सियासी ड्रामा*

इस संपत्ति विवाद ने तब सबसे बड़ा रूप ले लिया जब शिकायतकर्ता ने दावा किया कि सोनिया आनंद खुद को हरक सिंह रावत की पत्नी बताती हैं। इस दावे ने रावत परिवार के भीतर और बाहर एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया।
हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ति रावत ने एक वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि * वही हरक सिंह की कानूनी पत्नी हैं।*
दीप्ति रावत ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी दूसरी महिला को उनके पति की पत्नी बताना उनके परिवार के लिए गहरी मानसिक प्रताड़ना है। उन्होंने इस भ्रामक प्रचार के खिलाफ न्यायालय (कोर्ट) जाने की चेतावनी दी है।

*इतिहास खुद को दोहरा रहा है: याद आया 2003 का ‘जेनी प्रकरण’*

यह पहली बार नहीं है जब हरक सिंह रावत के निजी संबंध उनके राजनीतिक करियर और साख पर भारी पड़ रहे हैं। इस नए विवाद ने 23 साल पुराने ‘जेनी कांड’ के जख्मों को फिर से हरा कर दिया है:

साल 2003 में जेनी नाम की एक महिला ने हरक सिंह रावत पर गंभीर यौन शोषण के आरोप लगाए थे, जिसके बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

उस दौरान जेनी को एक बच्चा भी हुआ था। अब जब दो पत्नियों का विवाद गहराया, तो भाजपा नेता महेंद्र भट्ट का वह पुराना और आक्रामक सवाल फिर से हवा में तैरने लगा है—”आखिर जेनी के बच्चे का बाप कौन है?”

*’विवाद सिंह रावत’ का मौन: आखिर चुप्पी का राज क्या है?*

एक तरफ एक दिव्यांग बुजुर्ग न्याय की भीख मांग रहा है, दूसरी तरफ कानूनी पत्नी दीप्ति रावत को समाज के सामने आकर अपनी शादी की सफाई देनी पड़ रही है, और तीसरी तरफ पुराने केसों के कंकाल अलमारी से बाहर आ रहे हैं।

इन सबके बीच सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि हरक सिंह रावत पूरी तरह मौन क्यों हैं? हमेशा हर मुद्दे पर बेबाकी से बोलने वाले हरक सिंह की यह चुप्पी कई गहरे सवाल खड़े करती है:

*क्या यह चुप्पी किसी बड़े सच को छुपाने की कोशिश है?*

क्या सोनिया आनंद के साथ रिश्तों की वास्तविकता रावत के राजनीतिक भविष्य को पूरी तरह खत्म कर सकती है?
निष्कर्ष:

उत्तराखंड की राजनीति के यह ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले नेता आज खुद अपने ही बुने हुए विवादों के चक्रव्यूह में फंस चुके हैं। देखना यह होगा कि पुलिस की जांच और दीप्ति रावत के कानूनी कदम इस *’रहस्यमयी त्रिकोण’* से पर्दा कब उठाते हैं।

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