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उत्तराखंड

95% का टारगेट था, पहुंचे 98.7% पर; जानिए कैसे उत्तराखंड शिक्षा के क्षेत्र में बना देश की मिसाल।

*उत्तराखंड बना ‘पूर्ण साक्षर राज्य’, मात्र 2 साल में साक्षरता दर पहुंची 98.7% पर*

 

98.7% की साक्षरता दर हासिल कर उत्तराखंड (राज्य के राज्यपाल गुरमीत सिंह द्वारा अनुमोदित) भारत का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। यह उपलब्धि उल्लास – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में न्यूनतम 95% वयस्क साक्षरता के केंद्रीय मानक को पार करके प्राप्त की गई है।

 

 

*मिजोरम, गोवा ,त्रिपुरा,हिमाचल प्रदेश,सिक्किम के बाद उत्तराखंड बना पूर्ण साक्षर राज्य*

 

 

*साक्षरता दर 98.7 प्रतिशत पहुंची*

 

राज्य में सबसे पहले ‘उल्लास’ (अंडरस्टैंडिंग लाइफलांग लर्निंग फार आल इन सोसायटी) कार्यक्रम के तहत निरक्षर व्यक्तियों की पहचान की गई।

 

सर्वेक्षण के आधार पर उत्तराखंड की साक्षरता दर लगभग 98.7 प्रतिशत आंकी गई। यह केंद्र सरकार की ओर से पूर्ण साक्षरता के लिए निर्धारित 95 प्रतिशत के मानक से काफी अधिक है।

 

निदेशालय ने वर्ष 2023-24 के आंकड़ों का भी अध्ययन किया, जिसमें राज्य की साक्षरता दर 83.8 प्रतिशत दर्ज थी। इस प्रकार दो वर्षों में साक्षरता दर में 14.9 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

 

 

*केंद्रीय मानक से काफी आगे निकला उत्तराखंड*

 

 

सात वर्ष से अधिक आयु की राज्य की आबादी लगभग एक करोड़ 23 लाख 46 हजार आंकी गई। केंद्रीय मानकों के अनुसार राज्य में निरक्षरों की संख्या पांच लाख 11 हजार 731 से कम होनी चाहिए थी, लेकिन सर्वे में केवल एक लाख 31 हजार 986 व्यक्ति ही निरक्षर पाए गए।

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