उत्तराखंड
अंकिता भंडारी हत्याकांड: ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का असर, मजबूत कानूनी पैरवी से तीनों आरोपियों की जमानत अर्जी सिरे से खारिज।
अंकिता भंडारी हत्याकांड: धामी सरकार की मजबूत पैरवी ने अंकिता के हत्यारों को सलाखों से बाहर निकलने से रोका*
हाईकोर्ट ने खारिज की तीनों आरोपियों की जमानत याचिका
देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड के आरोपियों को जेल से बाहर निकालने की हर कोशिश पर पानी फिर गया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मामले के तीनों मुख्य आरोपियों की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। धामी सरकार की कोर्ट में मजबूत पैरवी और एसआईटी (SIT) की पुख्ता जांच के चलते आरोपियों को कानून से कोई राहत नहीं मिल सकी।
सरकार की सख्ती का असर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े रुख के कारण पुलिस और एसआईटी ने शुरुआत से ही इस मामले में बेहद बारीकी और मजबूती से साक्ष्य जुटाए। सरकार की इस जीरो-टॉलरेंस नीति का नतीजा है कि अदालत में आरोपियों के वकीलों की एक न चली।

अभियोजन पक्ष ने कोर्ट के सामने इतने पुख्ता सबूत पेश किए कि आरोपियों को जमानत मिलना नामुमकिन हो गया।
इंसाफ की उम्मीद हुई मजबूत
इस फैसले से उत्तराखंड की जनता और अंकिता के परिवार में इंसाफ की उम्मीद और मजबूत हुई है। सोशल मीडिया पर लोग धामी सरकार की इस कानूनी पैरवी की सराहना कर रहे हैं। देवभूमि की बेटी को न्याय दिलाने के लिए सरकार और पुलिस की इस जुगलबंदी ने साफ संदेश दिया है कि अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
