उत्तराखंड
धामी ने उत्तराखंड की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत की
पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की राजनीति में एक ऐसे नए युग की शुरुआत की है, जिसे ‘कठोर निर्णय और युवा नेतृत्व’ के काल के रूप में देखा जा रहा है। 4 जुलाई 2021 को जब उन्होंने कमान संभाली, तो वे राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने।
उनके नेतृत्व में उत्तराखंड की राजनीति में आए प्रमुख बदलाव निम्नलिखित हैं:
1. ‘मिथक’ तोड़ने वाला नेतृत्व
उत्तराखंड की राजनीति में यह माना जाता था कि कोई भी पार्टी सत्ता में वापसी नहीं करती। धामी के नेतृत्व में भाजपा ने 2022 के चुनावों में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर इस मिथक को तोड़ दिया। हालांकि वे अपनी व्यक्तिगत सीट हार गए थे, लेकिन पार्टी ने उनके ‘ब्रांड’ पर भरोसा जताया और उन्हें पुनः मुख्यमंत्री बनाया।
2. ऐतिहासिक और कड़े निर्णय (Dhami Model)
धामी सरकार की पहचान उनके साहसिक विधायी कार्यों से बनी है:
समान नागरिक संहिता (UCC): उत्तराखंड UCC पारित करने वाला देश का पहला राज्य बना। यह धामी के “नया उत्तराखंड” के विजन का सबसे बड़ा स्तंभ है।
नकल विरोधी कानून: देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू कर उन्होंने युवाओं के बीच अपनी पैठ मजबूत की।
धर्मांतरण विरोधी कानून: राज्य की जनसांख्यिकीय संरचना को बचाने के लिए उन्होंने सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून बनाया।
3. ‘सॉफ्ट पावर’ और विकास का समन्वय
धामी ने एक तरफ जहां ‘कठोर प्रशासक’ की छवि बनाई, वहीं दूसरी ओर ‘मुख्य सेवक’ के रूप में अपनी विनम्रता से जनता का दिल जीता। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ‘नव्य उत्तराखंड’ के सपने को धरातल पर उतारने के लिए बुनियादी ढांचे, विशेषकर चारधाम ऑल-वेदर रोड और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में तेजी लाई।
4. भ्रष्टाचार पर प्रहार और पारदर्शिता
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) भर्ती घोटाले जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई कर उन्होंने संदेश दिया कि उनकी सरकार में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है। “भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड” के लिए 1064 हेल्पलाइन नंबर की शुरुआत इसी दिशा में एक कदम है।
5. महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार
राज्य की महिलाओं के लिए 30% क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) को कानूनी रूप देना उनकी बड़ी उपलब्धि रही। ‘लखपति दीदी’ योजना और होमस्टे जैसी योजनाओं के माध्यम से उन्होंने पहाड़ की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया है।
पुष्कर सिंह धामी की राजनीति केवल सत्ता चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे उत्तराखंड को ‘आदर्श राज्य’ बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनके कार्यकाल को भविष्य में एक ऐसे मोड़ के रूप में याद किया जाएगा जहां उत्तराखंड ने अपनी क्षेत्रीय पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिकता और कड़े शासन की ओर कदम बढ़ाया।
