जानिए ‘फूलदेई’ त्यौहार की देवभूमि में खास मान्यता,धूमधाम से मनाया जा रहा त्योहार

रिपोर्टर-जीवन पांडे //देवभूमि उत्तराखंड में फूलदेई पर्व की खास मान्यता है, जहां कुमाऊं में इसे फूलदेई के रूप में मनाया जाता है वही गढ़वाल मैं इसे फूल संक्रांति के रूप में मनाया जाता है।
बच्चों की आस्था और हर्ष उल्लास का त्यौहार देवभूमि में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है ,वही ग्रामीण इलाके आज भी पहाड़ की संस्कृति को सजोये हुए हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार फूलदेई त्यौहार के पीछे एक रोचक पौराणिक कथा है ,जिसके अनुसार भगवान शिव शीतकाल में अपनी तपस्या में लीन थे कई ऋतु बदल गई पर शिव भगवान की तपस्या नहीं टूटी शिव की तपस्या तोड़ने के लिए पार्वती ने एक युक्ति निकाली उन्होंने शिव भक्तों को पीतांबरी वस्त्र पहनाकर अबोध बच्चों का स्वरूप दे दिया सभी अबोधबालक सुंदर सुंदर पुष्प चुनकर लाएं जिसकी खुशबू पूरे कैलाश में महक गई, फिर वही पुष्प शिव भगवान को चढ़ाए, जब भोलेनाथ की तंद्रा लीन मुद्रा भंग हुई तो उन्होंने अपने आगे सुंदर पुष्प लिए बालकों को देखा तो उनका क्रोध शांत हो गया ।लोगों की मान्यता के अनुसार उसी दिन से ही यह त्यौहार देवभूमि में मनाया जाता है,
वही आज लाल कुआं में भी ग्रामीण क्षेत्रों में फूलदेई का त्यौहार बच्चों ने बड़ी हर्षोल्लास और खुशी के साथ मनाया व घर घर जाकर घरों की चौखटो पर पुष्प अर्पित किए।
आम तौर पर छेत्र की ख़ुशहाली के तौर पर यह पर्व मनाया जाता है।

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