एक तरफ विकास के दावे ,तो एक जिला ऐसा जहां विकास के पीछे हटते कदमों ने, कर डाले कई गांव खाली, वीरान गांवो में अब नही रखता कोई कदम ।।

रिपोर्ट – मनीष उपाध्याय  //

केंद्र सरकार और राज्य सरकार विकास के लाख दावे कर ले लेकिन जमीनी हकीकत उससे उलट दिखाई पड़ती है जी हां वैसे तो उत्तराखंड में ऐसे बहुत से स्थान है जहां अभी तक शिक्षा स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी ग्रामीणों तक नहीं पहुंची है लेकिन सरकार और प्रशासनिक दावे अक्सर इतने हवा हवाई होते हैं कि वह सिर्फ कागजों पर ही दिखाई पड़ते हैं ऐसे ही चंपावत में एक दर्जन से भी अधिक ऐसे गांव हैं जहां पर ना तो स्वास्थ्य की सुविधा ना ही बच्चों के लिए शिक्षा और सड़क मार्ग तो दूर की बात है इन सब समस्याओं के बीच उत्तराखंड से पलायन ही होगा इसमें कोई दो राय नहीं है ,,,


चंपावत जिले के यह गांव मछियाड़, बालातड़ी ,मडिय़ोली, पोखरी, खरही ,कुकना साल, खरही, बालातड़ी, करौली, सिरना, पोखरी, मंगल लेख, मडिय़ोली, वेला, चल्थिया, बिनवाल गांव, तलाड़ी जैसे दर्जनों गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है

वही ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों का कहना है कि राजनीतिक दल के नेता सिर्फ यहां वोट मांगते समय ही पहुंचते हैं उसके बाद उनका यहां पहुंचना नामुमकिन सा लगता है क्योंकि बोट के बाद आखिरकार नेता जी का गांव में क्या काम जी हां इन गांवों में अगर अचानक किसी का स्वास्थ्य खराब हो जाए या फिर महिलाओं के प्रसव के दौरान काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और मरीजों को डोली के सहारे रोड तक ग्रामीणों की मदद से पहुंचाया जाता है आज से पहले चंपावत के इन्हें एक दर्जन गांवों में लोगों की संख्या काफी अत्यधिक थी लेकिन लगातार सुविधाओं ना मिलने के कारण अब यहां से लोग पलायन करने को मजबूर है हालांकि विधायक नेता सांसद जैसे नेता गण यहां काफी वायदे तो करके जाते हैं लेकिन आज तक वापस नहीं लौटे………………

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