सरयू के तट पर क्या लिया हरीश रावत ने संकल्प और सरयू के तट से क्या बोले पूर्व मुख्यमंत्री, पढ़ें पूरी खबर

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 ब्यूरो रिपोर्ट-
पूर्व सीएम हरीश रावत ने आज बागेश्वर के सरयू बगड़ में 11 मिनट का मौन उपवास रखा। इससे पहले उन्होंने सरयू बगड़ में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए कुली बेगार आंदोलन के 100 साल पूरे होने पर आंदोलनकारियों को याद किया। उन्होंने कहा कि आज उन्होंने किसानों के आंदोलन के समर्थन में मौन व्रत किया। शहीदों को याद किया, उन्होंने सरयू संगम तट से केंद्र व राज्य सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ 100 बार जल भरकर जल संकल्प भी लिया। उन्होंने कहा की राजनीति में धन-बल का प्रभाव बढ़ते जा रहा है। जिसके खिलाफ मैं संघर्ष करने के लिए सरयू बगड़ से एक संकल्प लेकर जा रहा हूं। आज की राजनीतिक हालातों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस वाले ही अब मंत्र सिखा रहे हैं।
 सरयू बगड़ में कुली बेगार प्रथा के शताब्दी वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को पहली राजनीतिक हार कहीं मिली तो वह उत्तराखंड में थी। उन्होंने कहा कि उनके मन में दो काम ना कर पाने की टीस रह गई। दोबारा सीएम बनने का मौका मिला तो वह जरुर करुंगा। उन्होंने कहा कि पहला काम 16 हजार बेरोजगारों का नौकरी देने का काम दूसरा महिलाओं के लिए सार्वभौमिक पोष्टिक योजना। पांच साल भाजपा सरकार को होने वाले है लेकिन उन्होंने केवल 7 हजार बेरोजगारों को ही नौकरी दे पाए है। कांग्रेस सरकार में जिन बेरोजगारों को रोजगार मिलना था वह भी ठंडे बस्ते में डाल दिया।
 वहीं कार्यक्रम के दौरान राज्य सभासांसद प्रदीप टम्टा ने भी केन्द्र और राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां सही नहीं है। जिससे आम जनता परेशान है।
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