उत्तराखंड में कोरोना के चलते दूरस्थ पहाड़ों में लौटी रौनक, कई सुने गांव, खंडहर बने घर और स्कूल फिर हुए गुलज़ार

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रिपोर्ट -राहुल सिंह दरमवाल

कोरोना के चलते पहाड़ के गांव में ही नहीं बल्कि स्कूलों में भी रौनक लौटने की उम्मीद है उत्तराखंड की बात करें तो कुमाऊँ से गढ़वाल तक सैकड़ों छोटे-छोटे ऐसे गांव हैं जहां पर लॉकडाउन के कारण बड़ेे महानगरों वापस लौटे हैं

वही मोना कोर्ट के प्राथमिक विद्यालय 19 साल बाद बच्चों ने प्रवेश लिया हालांकि अभी तक बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं महानगरों से लौटे बच्चों को भी अपने स्कूल खुलने का इंतजार है राज्य सरकार ने 10 से कम छात्र संख्या वाले स्कूल बंद करने के फैसले के कारण किल्ल गांव का स्कूल 2001 में बंद हो गया था इसके बाद 19 साल तक स्कूल में प्रवेश लेने को कोई बच्चा सामने नहीं आया लेकिन इस बार कक्षा 1 और 2 में अब तक 8 बच्चों ने प्रवेश लिया है यह बच्चे हैं जिनके अभिभावक महानगरों में नौकरी करते थे और कोरोना काल मैं लॉकडाउन लगने के कारण गांव लौटे हैं यह प्रवासी अब वापस नहीं जाना चाहते इसलिए उनके बच्चों को गांव में स्कूल प्रवेश दिलाया है गांव में अन्य स्कूलों की दूरी ज्यादा होने से शिक्षा विभाग ने भी बंद पड़े स्कूलो को खोल दिया प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश लिए छात्र-छात्राओं को विभाग की ओर से मिड डे मील एमडीए की सुविधा भी दी जा रही है गौरतलब है कि ऐसे सैकड़ों गांव और स्कूलो मै रौनक लौटने की उम्मीद है

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